ग्वालियर सिर्फ ऐतिहासिक किलों और महलों के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है। शहर में भारतीय लोकतंत्र के इतिहास से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण धरोहर भी सुरक्षित है। महाराज बाड़ा स्थित केंद्रीय पुस्तकालय में भारतीय संविधान की एक दुर्लभ मूल प्रति सुरक्षित रखी गई है। इस प्रति की खासियत यह है कि इसके अंतिम पन्नों पर संविधान सभा के 286 सदस्यों के मूल हस्ताक्षर मौजूद हैं।
संविधान की यह प्रति अपने आप में भारतीय गणतंत्र के निर्माण की कहानी को समेटे हुए है। संविधान सभा के सदस्यों ने जिस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे, उसकी दुर्लभ प्रतियों में से एक ग्वालियर में सुरक्षित है। इसमें देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. भीमराव आंबेडकर, पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे प्रमुख नेताओं के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं।
यह प्रति केवल एक ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं बल्कि भारत के लोकतांत्रिक विकास का प्रत्यक्ष प्रमाण है। संविधान निर्माण की प्रक्रिया में देश के विभिन्न क्षेत्रों और विचारों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों ने भाग लिया था। उनके हस्ताक्षर इस दस्तावेज को ऐतिहासिक और भावनात्मक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाते हैं।
ग्वालियर में इस संविधान प्रति की मौजूदगी शहर के लिए गौरव का विषय है। विशेष अवसरों पर इसे आम लोगों के लिए प्रदर्शित किए जाने की जानकारी भी सामने आती रही है। ऐसे मौकों पर विद्यार्थी, युवा और इतिहास में रुचि रखने वाले लोग इसे देखने पहुंचते हैं।
संविधान की मूल प्रति को सुरक्षित रखना बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि समय के साथ ऐतिहासिक दस्तावेजों की स्थिति को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। इस तरह की धरोहर आने वाली पीढ़ियों को यह समझने में मदद करती है कि भारत का लोकतांत्रिक ढांचा किस ऐतिहासिक प्रक्रिया से होकर बना।
80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ग्वालियर की यह धरोहर एक बार फिर चर्चा में है और शहर के इतिहास को राष्ट्रीय महत्व से जोड़ती है।